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बिहार के 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुरू होगी AI की पढ़ाई, युवाओं को मिलेगा टेक्नोलॉजी करियर का बड़ा मौका

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बिहार के 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 2026-27 सत्र से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग की पढ़ाई शुरू होगी। AICTE ने नए कोर्सों को मंजूरी दे दी है। इससे तकनीकी शिक्षा और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।

पटना/आलम की खबर:बिहार में तकनीकी शिक्षा को आधुनिक बनाने और युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के 10 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक कोर्स की पढ़ाई शुरू होगी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यानी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने इन नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को बिहार के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार नए कोर्स शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू किए जाएंगे। इन कोर्सों को शुरू करने के लिए संबंधित इंजीनियरिंग कॉलेजों ने वर्ष 2025 में आवेदन किया था। अब मंजूरी मिलने के बाद विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग के अनुसार प्रत्येक कॉलेज में AI और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग कोर्स के लिए 60-60 सीटों पर नामांकन लिया जाएगा। यह कोर्स बीटेक स्तर पर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग शाखा के अंतर्गत संचालित होंगे।

सरकार का मानना है कि बदलते समय में तकनीकी शिक्षा को केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। दुनिया तेजी से डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों की ओर बढ़ रही है। ऐसे में बिहार के छात्रों को भी आधुनिक टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री की मांग के अनुसार तैयार करना जरूरी हो गया है। यही वजह है कि राज्य सरकार और तकनीकी शिक्षा विभाग ने AI आधारित कोर्स शुरू करने की पहल की है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। बड़ी आईटी कंपनियों से लेकर बैंकिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं तक में AI तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इन विषयों की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए देश और विदेश दोनों जगह बेहतर करियर की संभावनाएं खुल सकती हैं।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का कहना है कि कंप्यूटर साइंस और उससे जुड़ी शाखाओं की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। अधिकांश इंजीनियरिंग संस्थानों में कंप्यूटर साइंस की सीटें सबसे पहले भर जाती हैं। यही कारण है कि AI और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग जैसे कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया गया है ताकि छात्रों को नई तकनीकों की जानकारी मिल सके और वे उद्योगों की जरूरत के अनुसार खुद को तैयार कर सकें।

इन कोर्सों के तहत छात्रों को आधुनिक तकनीकी विषयों की गहन पढ़ाई कराई जाएगी। पाठ्यक्रम में डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एल्गोरिद्म डिजाइन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और एडवांस कंप्यूटिंग जैसे विषय शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा छात्रों को रिसर्च और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि वे सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें।

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विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन कोर्सों के संचालन के लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही कॉलेजों में आधुनिक कंप्यूटर लैब, सॉफ्टवेयर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जाएगा। सरकार चाहती है कि बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज भी राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी संस्थानों की तरह आधुनिक शिक्षा प्रदान करें।

जिन इंजीनियरिंग कॉलेजों में AI और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग की पढ़ाई शुरू होगी उनमें बख्तियारपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, छपरा इंजीनियरिंग कॉलेज, सुपौल इंजीनियरिंग कॉलेज, दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज, पूर्णिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और वैशाली इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बिहार के छात्रों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। अब छात्रों को AI और एडवांस टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़ेगा। इससे न केवल छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि राज्य के तकनीकी संस्थानों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

बिहार के युवाओं में भी इस फैसले को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई छात्र लंबे समय से AI और आधुनिक कंप्यूटर टेक्नोलॉजी से जुड़े कोर्स की मांग कर रहे थे। छात्रों का कहना है कि नई तकनीक आधारित कोर्स शुरू होने से उन्हें बेहतर नौकरी और स्टार्टअप के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही बिहार से भी टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल कोर्स शुरू करना ही पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी है कि कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, उद्योगों से जुड़ाव और बेहतर प्लेसमेंट व्यवस्था भी विकसित की जाए। यदि सरकार इन पहलुओं पर भी गंभीरता से काम करती है तो बिहार आने वाले समय में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी पहचान बना सकता है।

फिलहाल AI और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग कोर्स शुरू करने के फैसले ने बिहार के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है। यह कदम न केवल युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराएगा, बल्कि राज्य को डिजिटल और तकनीकी विकास की दिशा में भी आगे बढ़ाने का काम करेगा।

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